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mahabharat 5.22.29: शिशुपाल, जो द्वारथ युद्ध में विजयी होने की आशा से भगवान कृष्ण के विरुद्ध हो गया और उन पर बड़ी शक्ति से आक्रमण किया, भगवान कृष्ण द्वारा मारा गया और निर्जीव होकर सदा के लिए भूमि पर लेट गया, मानो कोई कनेर का वृक्ष वायु के वेग से उखड़कर नीचे गिर गया हो।   |   mahabharat अध्याय 5.22: धृतराष्ट्रका संजयसे पाण्डवोंके प्रभाव और प्रतिभाका वर्णन करते हुए उसे संदेश देकर पाण्डवोंके पास भेजना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 22: धृतराष्ट्रका संजयसे पाण्डवोंके प्रभाव और प्रतिभाका वर्णन करते हुए उसे संदेश देकर पाण्डवोंके पास भेजना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.22.29 
यस्तं प्रतीपस्तरसा प्रत्युदीया-
दाशंसमानो द्वैरथे वासुदेवम्।
सोऽशेत कृष्णेन हत: परासु-
र्वातेनेवोन्मथित: कर्णिकार:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
शिशुपाल, जो द्वारथ युद्ध में विजयी होने की आशा से भगवान कृष्ण के विरुद्ध हो गया और उन पर बड़ी शक्ति से आक्रमण किया, भगवान कृष्ण द्वारा मारा गया और निर्जीव होकर सदा के लिए भूमि पर लेट गया, मानो कोई कनेर का वृक्ष वायु के वेग से उखड़कर नीचे गिर गया हो।
 
Sisupala, who, hoping to be victorious in the Dvaratha war, turned against Lord Krishna and attacked Him with great force, was killed by Lord Krishna and became lifeless and lay down on the ground forever, as if an oleander tree had been uprooted and fallen down due to the force of the wind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)