सहोषितश्चरितार्थो वय:स्थो
मात्स्येयानामधिपो वै विराट:।
स वै सपुत्र: पाण्डवार्थे च शश्वद्
युधिष्ठिरं भक्त इति श्रुतं मे॥ १९॥
अनुवाद
मत्स्यदेश के राजा विराट भी अपने पुत्रों सहित पाण्डवों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। मैंने सुना है कि वे युधिष्ठिर के परम भक्त हैं। कारण यह है कि वनवास के समय वे एक वर्ष तक युधिष्ठिर के साथ रहे थे और उनके गौधन की रक्षा युधिष्ठिर ने की थी। आयु में वृद्ध होने पर भी युद्ध में वे युवक के समान प्रतीत होते हैं॥19॥
King Virat of Matsyadesh is also always ready to help the Pandavas along with his sons. I have heard that he is a great devotee of Yudhishthira. The reason is that during the exile he stayed with Yudhishthira for one year and his cattle were protected by Yudhishthira. Even though he is old in age, he looks like a young man in the war.॥19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥