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mahabharat 5.22.15: उसने अस्त्र-शस्त्र विद्या में उत्तम शिक्षा प्राप्त की है। वह बड़ा बलवान योद्धा है। मेरे पुत्रों ने उससे शत्रुता कर ली है और वे सदैव क्रोध से भरे रहते हैं; इसलिए यदि युद्ध हुआ, तो भीमसेन मेरे नीच स्वभाव वाले पुत्रों को बड़े बल से (क्रोध से) भस्म कर देगा। स्वयं इन्द्र भी उसे युद्ध में बल से नहीं हरा सकता॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 5.22: धृतराष्ट्रका संजयसे पाण्डवोंके प्रभाव और प्रतिभाका वर्णन करते हुए उसे संदेश देकर पाण्डवोंके पास भेजना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 22: धृतराष्ट्रका संजयसे पाण्डवोंके प्रभाव और प्रतिभाका वर्णन करते हुए उसे संदेश देकर पाण्डवोंके पास भेजना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.22.15 
सुशिक्षित: कृतवैरस्तरस्वी
दहेत् क्षुद्रांस्तरसा धार्तराष्ट्रान्।
सदात्यमर्षी न बलात् स शक्यो
युद्धे जेतुं वासवेनापि साक्षात्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उसने अस्त्र-शस्त्र विद्या में उत्तम शिक्षा प्राप्त की है। वह बड़ा बलवान योद्धा है। मेरे पुत्रों ने उससे शत्रुता कर ली है और वे सदैव क्रोध से भरे रहते हैं; इसलिए यदि युद्ध हुआ, तो भीमसेन मेरे नीच स्वभाव वाले पुत्रों को बड़े बल से (क्रोध से) भस्म कर देगा। स्वयं इन्द्र भी उसे युद्ध में बल से नहीं हरा सकता॥ 15॥
 
He has received good training in the art of weapons. He is a very powerful warrior. My sons have taken an enmity towards him and they are always filled with great resentment; therefore, if a war takes place, Bhimasena will burn my mean-natured sons to ashes with great force (with his anger). Even Indra himself cannot defeat him in battle by force.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)