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mahabharat 5.22.13: गाण्डीव धनुष धारण करने वाले पाण्डुपुत्र सव्यसाची अर्जुन ही हैं जिन्होंने खाण्डव वन में इन्द्र सहित सम्पूर्ण देवताओं को जीत लिया था और पाण्डवों का यश और सम्मान बढ़ाते हुए उस वन को अग्निदेव को दान में दे दिया था॥13॥   |   mahabharat अध्याय 5.22: धृतराष्ट्रका संजयसे पाण्डवोंके प्रभाव और प्रतिभाका वर्णन करते हुए उसे संदेश देकर पाण्डवोंके पास भेजना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 22: धृतराष्ट्रका संजयसे पाण्डवोंके प्रभाव और प्रतिभाका वर्णन करते हुए उसे संदेश देकर पाण्डवोंके पास भेजना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.22.13 
यश्चैव देवान् खाण्डवे सव्यसाची
गाण्डीवधन्वा प्रजिगाय सेन्द्रान्।
उपाहरत् पाण्डवो जातवेदसे
यशो मानं वर्धयन् पाण्डवानाम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
गाण्डीव धनुष धारण करने वाले पाण्डुपुत्र सव्यसाची अर्जुन ही हैं जिन्होंने खाण्डव वन में इन्द्र सहित सम्पूर्ण देवताओं को जीत लिया था और पाण्डवों का यश और सम्मान बढ़ाते हुए उस वन को अग्निदेव को दान में दे दिया था॥13॥
 
Savyasachi Arjun, the son of Pandu, who holds the Gandiva bow, is the one who had won over all the gods including Indra in the Khandava forest and, increasing the fame and respect of the Pandavas, had offered that forest as a gift to Agnidev. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)