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mahabharat 5.22.1: धृतराष्ट्र ने कहा- संजय! लोग कहते हैं कि पांडव उपप्लव्य नामक स्थान पर पहुँच गए हैं। तुम वहाँ जाकर उनका हालचाल पूछो। अजातशत्रु युधिष्ठिर से आदरपूर्वक मिलो और उनसे कहो कि यह सौभाग्य की बात है कि तुम पूरी तैयारी के साथ अपने उचित स्थान पर पहुँच गए हो।   |   mahabharat अध्याय 5.22: धृतराष्ट्रका संजयसे पाण्डवोंके प्रभाव और प्रतिभाका वर्णन करते हुए उसे संदेश देकर पाण्डवोंके पास भेजना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.22.1 
धृतराष्ट्र उवाच
प्राप्तानाहु: संजय पाण्डुपुत्रा-
नुपप्लव्ये तान् विजानीहि गत्वा।
अजातशत्रुं च सभाजयेथा
दिष्टॺाऽऽनह्य स्थानमुपस्थितस्त्वम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने कहा- संजय! लोग कहते हैं कि पांडव उपप्लव्य नामक स्थान पर पहुँच गए हैं। तुम वहाँ जाकर उनका हालचाल पूछो। अजातशत्रु युधिष्ठिर से आदरपूर्वक मिलो और उनसे कहो कि यह सौभाग्य की बात है कि तुम पूरी तैयारी के साथ अपने उचित स्थान पर पहुँच गए हो।
 
Dhritarashtra said- Sanjay! People say that the Pandavas have reached a place called Upaplavya. You go there and find out about them. Meet Ajatashatru Yudhishthira respectfully and tell him that it is a matter of good fortune that you have arrived at your appropriate place, all prepared.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)