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mahabharat 5.21.9: ब्रह्म! इस संसार में जो घटना घट चुकी है, वह किसी से अज्ञात नहीं है। उसे बार-बार दोहराने या उस पर व्याख्यान देने से क्या लाभ है?॥9॥   |   mahabharat अध्याय 5.21: भीष्मके द्वारा द्रुपदके पुरोहितकी बातका समर्थन करते हुए अर्जुनकी प्रशंसा करना, इसके विरुद्ध कर्णके आक्षेपपूर्ण वचन तथा धृतराष्ट्रद्वारा भीष्मकी बातका समर्थन करते हुए दूतको सम्मानित करके विदा करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 21: भीष्मके द्वारा द्रुपदके पुरोहितकी बातका समर्थन करते हुए अर्जुनकी प्रशंसा करना, इसके विरुद्ध कर्णके आक्षेपपूर्ण वचन तथा धृतराष्ट्रद्वारा भीष्मकी बातका समर्थन करते हुए दूतको सम्मानित करके विदा करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.21.9 
न तत्राविदितं ब्रह्मँल्लोके भूतेन केनचित्।
पुनरुक्तेन किं तेन भाषितेन पुन: पुन:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्म! इस संसार में जो घटना घट चुकी है, वह किसी से अज्ञात नहीं है। उसे बार-बार दोहराने या उस पर व्याख्यान देने से क्या लाभ है?॥9॥
 
Brahman! The event which has happened in this world is not unknown to anyone. What is the use of repeating it or giving lectures on it again and again?॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)