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mahabharat 5.21.6: कुन्तीपुत्र किरीटधारी अर्जुन बलवान और शस्त्रविद्या में निपुण हैं। ऐसा कौन वीर है जो युद्ध में पाण्डुपुत्र अर्जुन के पराक्रम का सामना कर सके?   |   mahabharat अध्याय 5.21: भीष्मके द्वारा द्रुपदके पुरोहितकी बातका समर्थन करते हुए अर्जुनकी प्रशंसा करना, इसके विरुद्ध कर्णके आक्षेपपूर्ण वचन तथा धृतराष्ट्रद्वारा भीष्मकी बातका समर्थन करते हुए दूतको सम्मानित करके विदा करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 21: भीष्मके द्वारा द्रुपदके पुरोहितकी बातका समर्थन करते हुए अर्जुनकी प्रशंसा करना, इसके विरुद्ध कर्णके आक्षेपपूर्ण वचन तथा धृतराष्ट्रद्वारा भीष्मकी बातका समर्थन करते हुए दूतको सम्मानित करके विदा करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.21.6 
किरीटी बलवान् पार्थ: कृतास्त्रश्च महारथ:।
को हि पाण्डुसुतं युद्धे विषहेत धनंजयम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीपुत्र किरीटधारी अर्जुन बलवान और शस्त्रविद्या में निपुण हैं। ऐसा कौन वीर है जो युद्ध में पाण्डुपुत्र अर्जुन के पराक्रम का सामना कर सके?
 
The crowned warrior Arjun, son of Kunti, is strong and adept in the art of weaponry. Who is such a brave man who can withstand the might of Pandu's son Arjun in battle? 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)