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mahabharat 5.21.4: आपने जो कुछ कहा है वह सत्य है; इसमें कोई संदेह नहीं है। परन्तु आपके शब्द अत्यंत कठोर हैं। मुझे लगता है कि यह कठोरता ब्राह्मण स्वभाव के कारण है।   |   mahabharat अध्याय 5.21: भीष्मके द्वारा द्रुपदके पुरोहितकी बातका समर्थन करते हुए अर्जुनकी प्रशंसा करना, इसके विरुद्ध कर्णके आक्षेपपूर्ण वचन तथा धृतराष्ट्रद्वारा भीष्मकी बातका समर्थन करते हुए दूतको सम्मानित करके विदा करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 21: भीष्मके द्वारा द्रुपदके पुरोहितकी बातका समर्थन करते हुए अर्जुनकी प्रशंसा करना, इसके विरुद्ध कर्णके आक्षेपपूर्ण वचन तथा धृतराष्ट्रद्वारा भीष्मकी बातका समर्थन करते हुए दूतको सम्मानित करके विदा करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.21.4 
भवता सत्यमुक्तं तु सर्वमेतन्न संशय:।
अतितीक्ष्णं तु ते वाक्यं ब्राह्मण्यादिति मे मति:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
आपने जो कुछ कहा है वह सत्य है; इसमें कोई संदेह नहीं है। परन्तु आपके शब्द अत्यंत कठोर हैं। मुझे लगता है कि यह कठोरता ब्राह्मण स्वभाव के कारण है।
 
Whatever you have said is true; there is no doubt about it. But your words are very harsh. It seems to me that this harshness is due to the brahmin nature.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)