Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.21.3: कुरुवंश को आनन्द प्रदान करने वाले पाँचों पाण्डव भाई शान्ति के इच्छुक हैं, यह सौभाग्य की बात है। वे अपने स्वजनों से युद्ध करने में रुचि नहीं रखते, यह भी सौभाग्य की बात है।॥3॥ | mahabharat अध्याय 5.21: भीष्मके द्वारा द्रुपदके पुरोहितकी बातका समर्थन करते हुए अर्जुनकी प्रशंसा करना, इसके विरुद्ध कर्णके आक्षेपपूर्ण वचन तथा धृतराष्ट्रद्वारा भीष्मकी बातका समर्थन करते हुए दूतको सम्मानित करके विदा करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दिष्टॺा च संधिकामास्ते भ्रातर: कुरुनन्दना:।
दिष्टॺा न युद्धमनस: पाण्डवा: सह बान्धवै:॥ ३॥
अनुवाद
कुरुवंश को आनन्द प्रदान करने वाले पाँचों पाण्डव भाई शान्ति के इच्छुक हैं, यह सौभाग्य की बात है। वे अपने स्वजनों से युद्ध करने में रुचि नहीं रखते, यह भी सौभाग्य की बात है।॥3॥
The five Pandava brothers who bring joy to the Kuru clan are desirous of peace, this is a matter of good fortune. They are not interested in fighting with their relatives, this is also a matter of good fortune.॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥