Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.21.20: ब्रह्मन्! अब मैं इस पर विचार करके संजय को पाण्डवों के पास भेजूँगा। तुम पुनः पाण्डवों के पास आओ, विलम्ब न करो।॥20॥   |   mahabharat अध्याय 5.21: भीष्मके द्वारा द्रुपदके पुरोहितकी बातका समर्थन करते हुए अर्जुनकी प्रशंसा करना, इसके विरुद्ध कर्णके आक्षेपपूर्ण वचन तथा धृतराष्ट्रद्वारा भीष्मकी बातका समर्थन करते हुए दूतको सम्मानित करके विदा करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 21: भीष्मके द्वारा द्रुपदके पुरोहितकी बातका समर्थन करते हुए अर्जुनकी प्रशंसा करना, इसके विरुद्ध कर्णके आक्षेपपूर्ण वचन तथा धृतराष्ट्रद्वारा भीष्मकी बातका समर्थन करते हुए दूतको सम्मानित करके विदा करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.21.20 
चिन्तयित्वा तु पार्थेभ्य: प्रेषयिष्यामि संजयम्।
स भवान् प्रति यात्वद्य पाण्डवानेव मा चिरम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! अब मैं इस पर विचार करके संजय को पाण्डवों के पास भेजूँगा। तुम पुनः पाण्डवों के पास आओ, विलम्ब न करो।॥20॥
 
Brahman! Now I will think over it and then send Sanjaya to the Pandavas. You should come to the Pandavas again, do not delay.'॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)