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mahabharat 5.21.19: शान्तनु नन्दन भीष्म ने हमारे लिए यह कल्याणकारी बात कही है। यह पाण्डवों तथा सम्पूर्ण जगत के लिए कल्याणकारी है॥19॥   |   mahabharat अध्याय 5.21: भीष्मके द्वारा द्रुपदके पुरोहितकी बातका समर्थन करते हुए अर्जुनकी प्रशंसा करना, इसके विरुद्ध कर्णके आक्षेपपूर्ण वचन तथा धृतराष्ट्रद्वारा भीष्मकी बातका समर्थन करते हुए दूतको सम्मानित करके विदा करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 21: भीष्मके द्वारा द्रुपदके पुरोहितकी बातका समर्थन करते हुए अर्जुनकी प्रशंसा करना, इसके विरुद्ध कर्णके आक्षेपपूर्ण वचन तथा धृतराष्ट्रद्वारा भीष्मकी बातका समर्थन करते हुए दूतको सम्मानित करके विदा करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.21.19 
अस्मद्धितं वाक्यमिदं भीष्म: शान्तनवोऽब्रवीत्।
पाण्डवानां हितं चैव सर्वस्य जगतस्तथा॥ १९॥
 
 
अनुवाद
शान्तनु नन्दन भीष्म ने हमारे लिए यह कल्याणकारी बात कही है। यह पाण्डवों तथा सम्पूर्ण जगत के लिए कल्याणकारी है॥19॥
 
Shantanu Nandan Bhishma has said this beneficial thing for us. This is beneficial for the Pandavas and the entire world.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)