श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 21: भीष्मके द्वारा द्रुपदके पुरोहितकी बातका समर्थन करते हुए अर्जुनकी प्रशंसा करना, इसके विरुद्ध कर्णके आक्षेपपूर्ण वचन तथा धृतराष्ट्रद्वारा भीष्मकी बातका समर्थन करते हुए दूतको सम्मानित करके विदा करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.21.16 
भीष्म उवाच
किं नु राधेय वाचा ते कर्म तत् स्मर्तुमर्हसि।
एक एव यदा पार्थ: षड्रथाञ्जितवान् युधि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
भीष्म ने कहा, "ऐसी अतिशयोक्ति करने से क्या लाभ? तुम्हें पार्थ की वीरता याद रखनी चाहिए, जब विराटनगर के युद्ध में उसने अकेले ही छह अतिरथ योद्धाओं सहित पूरी सेना को परास्त कर दिया था।"
 
Bhishma said, "What is the use of such exaggeration that you make? You should remember the valour of Partha, when in the battle of Viratnagar he alone defeated the entire army including six Atiratha warriors."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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