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mahabharat 5.21.15: यदि पाण्डव धर्म का परित्याग करके युद्ध करना चाहते हैं, तो जब उनका सामना इन श्रेष्ठ कुरु योद्धाओं से होगा, तब उन्हें मेरे ये शब्द याद आएँगे।'   |   mahabharat अध्याय 5.21: भीष्मके द्वारा द्रुपदके पुरोहितकी बातका समर्थन करते हुए अर्जुनकी प्रशंसा करना, इसके विरुद्ध कर्णके आक्षेपपूर्ण वचन तथा धृतराष्ट्रद्वारा भीष्मकी बातका समर्थन करते हुए दूतको सम्मानित करके विदा करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 21: भीष्मके द्वारा द्रुपदके पुरोहितकी बातका समर्थन करते हुए अर्जुनकी प्रशंसा करना, इसके विरुद्ध कर्णके आक्षेपपूर्ण वचन तथा धृतराष्ट्रद्वारा भीष्मकी बातका समर्थन करते हुए दूतको सम्मानित करके विदा करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.21.15 
अथ ते धर्ममुत्सृज्य युद्धमिच्छन्ति पाण्डवा:।
आसाद्येमान् कुरुश्रेष्ठान् स्मरिष्यन्ति वचो मम॥ १५॥
 
 
अनुवाद
यदि पाण्डव धर्म का परित्याग करके युद्ध करना चाहते हैं, तो जब उनका सामना इन श्रेष्ठ कुरु योद्धाओं से होगा, तब उन्हें मेरे ये शब्द याद आएँगे।'
 
If the Pandavas wish to abandon Dharma and fight the war, they will remember my words when they encounter these best of Kuru warriors.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)