Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.21.13: यदि पाण्डव अपने पूर्वजों का राज्य पुनः लेना चाहते हैं, तो उन्हें पहले से प्रतिज्ञा की हुई अवधि तक पुनः वन में रहना होगा ॥13॥ | mahabharat अध्याय 5.21: भीष्मके द्वारा द्रुपदके पुरोहितकी बातका समर्थन करते हुए अर्जुनकी प्रशंसा करना, इसके विरुद्ध कर्णके आक्षेपपूर्ण वचन तथा धृतराष्ट्रद्वारा भीष्मकी बातका समर्थन करते हुए दूतको सम्मानित करके विदा करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि काङ्क्षन्ति ते राज्यं पितृपैतामहं पुन:।
यथाप्रतिज्ञं कालं तं चरन्तु वनमाश्रिता:॥ १३॥
अनुवाद
यदि पाण्डव अपने पूर्वजों का राज्य पुनः लेना चाहते हैं, तो उन्हें पहले से प्रतिज्ञा की हुई अवधि तक पुनः वन में रहना होगा ॥13॥
If the Pandavas wish to take back their forefathers' kingdom, then they must once again live in the forest for the period they had pledged earlier. ॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥