श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 21: भीष्मके द्वारा द्रुपदके पुरोहितकी बातका समर्थन करते हुए अर्जुनकी प्रशंसा करना, इसके विरुद्ध कर्णके आक्षेपपूर्ण वचन तथा धृतराष्ट्रद्वारा भीष्मकी बातका समर्थन करते हुए दूतको सम्मानित करके विदा करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.21.11 
स तं समयमाश्रित्य राज्यं नेच्छति पैतृकम्।
बलमाश्रित्य मत्स्यानां पञ्चालानां च मूर्खवत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
‘ऐसा नहीं है कि युधिष्ठिर उस शर्त को पूरा करके अपने पैतृक राज्य को पुनः प्राप्त करना चाहते हैं। वे मूर्खों की भाँति मत्स्य और पांचाल देशों की सेनाओं पर निर्भर होकर राज्य पर अधिकार करना चाहते हैं।॥11॥
 
‘It is not the case that Yudhishthira wants to fulfill that condition and regain his ancestral kingdom. Like a fool, he wants to take over the kingdom by relying on the armies of Matsya and Panchala countries.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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