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mahabharat 5.20.4-5: राजा धृतराष्ट्र और पाण्डु दोनों एक ही पिता के प्रतापी पुत्र हैं। इसमें सन्देह नहीं कि पैतृक सम्पत्ति में दोनों का समान अधिकार है। धृतराष्ट्र के पुत्रों को तो पैतृक सम्पत्ति मिल गई, किन्तु पाण्डवों को वह पैतृक सम्पत्ति क्यों न मिले?॥4-5॥   |   mahabharat अध्याय 5.20: द्रुपदके पुरोहितका कौरवसभामें भाषण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 20: द्रुपदके पुरोहितका कौरवसभामें भाषण  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  5.20.4-5 
धृतराष्ट्रश्च पाण्डुश्च सुतावेकस्य विश्रुतौ।
तयो: समानं द्रविणं पैतृकं नात्र संशय:॥ ४॥
धृतराष्ट्रस्य ये पुत्रा: प्राप्तं तै: पैतृकं वसु।
पाण्डुपुत्रा: कथं नाम न प्राप्ता: पैतृकं वसु॥ ५॥
 
 
अनुवाद
राजा धृतराष्ट्र और पाण्डु दोनों एक ही पिता के प्रतापी पुत्र हैं। इसमें सन्देह नहीं कि पैतृक सम्पत्ति में दोनों का समान अधिकार है। धृतराष्ट्र के पुत्रों को तो पैतृक सम्पत्ति मिल गई, किन्तु पाण्डवों को वह पैतृक सम्पत्ति क्यों न मिले?॥4-5॥
 
‘King Dhritarashtra and Pandu are both illustrious sons of the same father. There is no doubt that both have equal rights in the ancestral property. The sons of Dhritarashtra have received their ancestral property, but why should the Pandavas not get that ancestral property?॥ 4-5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)