श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 20: द्रुपदके पुरोहितका कौरवसभामें भाषण  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.20.11 
तथा विराटनगरे योन्यन्तरगतैरिव।
प्राप्त: परमसंक्लेशो यथा पापैर्महात्मभि:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'इतना ही नहीं, अन्य जन्मों के पापियों की भाँति इन महात्माओं को विराटनगर में भी महान् कष्ट सहने पड़े॥11॥
 
‘Not only this, like the sinners in other births, these great souls had to endure great suffering in Viratnagar too.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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