Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.2.12-13h: इसलिए यहाँ से भेजे गए दूत को धृतराष्ट्र के सामने झुककर अत्यंत विनम्रता और आदरपूर्वक बोलना चाहिए। ऐसा करके ही वह धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन का उपयोग अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए कर सकता है। | mahabharat अध्याय 5.2: बलरामजीका भाषण । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्मात् प्रणम्यैव वचो ब्रवीतु
वैचित्रवीर्यं बहुसामयुक्तम्॥ १२॥
तथा हि शक्यो धृतराष्ट्रपुत्र:
स्वार्थे नियोक्तुं पुरुषेण तेन।
अनुवाद
इसलिए यहाँ से भेजे गए दूत को धृतराष्ट्र के सामने झुककर अत्यंत विनम्रता और आदरपूर्वक बोलना चाहिए। ऐसा करके ही वह धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन का उपयोग अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए कर सकता है।
Therefore, the messenger sent from here should bow before Dhritarashtra and speak very politely and with due respect. Only by doing so can he use Dhritarashtra's son Duryodhan to achieve his purpose. 12 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥