Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.196.5-7: तत्पश्चात् सम्पूर्ण सेना को यथाशक्ति सम्मानित करके श्रेष्ठ राजा युधिष्ठिर ने उन सैनिकों को विदा करने की आज्ञा दी और सेना तथा सवारों सहित उन श्रेष्ठ राजाओं को उत्तम भोजन और पेय देने की आज्ञा दी। उन्होंने अपने साथ आए हुए समस्त हाथी, घोड़े, मनुष्य और शिल्पियों के लिए भोजन कराने की आज्ञा दी। | mahabharat अध्याय 5.196: पाण्डवसेनाका युद्धके लिये प्रस्थान । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथ सैन्यं यथायोगं पूजयित्वा नरर्षभ:॥ ५॥
दिदेश तान्यनीकानि प्रयाणाय महीपति:।
तेषां युधिष्ठिरो राजा ससैन्यानां महात्मनाम्॥ ६॥
व्यादिदेश सवाह्यानां भक्ष्यभोज्यमनुत्तमम्।
सगजाश्वमनुष्याणां ये च शिल्पोपजीविन:॥ ७॥
अनुवाद
तत्पश्चात् सम्पूर्ण सेना को यथाशक्ति सम्मानित करके श्रेष्ठ राजा युधिष्ठिर ने उन सैनिकों को विदा करने की आज्ञा दी और सेना तथा सवारों सहित उन श्रेष्ठ राजाओं को उत्तम भोजन और पेय देने की आज्ञा दी। उन्होंने अपने साथ आए हुए समस्त हाथी, घोड़े, मनुष्य और शिल्पियों के लिए भोजन कराने की आज्ञा दी।
After that, after honoring the entire army as per their ability, the best king Yudhishthir ordered those soldiers to depart and ordered to give the best food and drinks to those great kings along with the army and riders. He ordered to serve food for all the elephants, horses, humans and craftsmen who were with him. 5-7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥