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श्लोक 5.196.35  |
तत्र भेरीसहस्राणि शङ्खानामयुतानि च।
न्यवादयन्त संहृष्टा: सहस्रायुतशो नरा:॥ ३५॥ |
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| अनुवाद |
| उस समय उस युद्धस्थल में लाखों लोग हर्ष और उत्साह से भरकर हजारों तुरहियाँ और शंख बजा रहे थे। |
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| At that time, millions of people in that battle-field, filled with joy and enthusiasm, were blowing thousands of trumpets and conches. |
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इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि अम्बोपाख्यानपर्वणि पाण्डवसेनानिर्याणे षण्णवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १९६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत अम्बोपाख्यानपर्वमें पाण्डवसेनानिर्याणविषयक एक सौ छानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९६॥
उद्योगपर्व सम्पूर्णम् अनुष्टुप् छन्द (अन्य बड़े छन्द) बड़े छन्दोंको ३२ अक्षरोंके कुलयोग अनुष्टुप् मानकर गिननेपर उत्तर भारतीय पाठसे लिये गये श्लोक—५९७८॥ (७८४१-) १०७८।--- ७०५६।॥--- दक्षिण भारतीय पाठसे लिये गये श्लोक—६८॥ (५॥ ) ७॥-७६- उद्योगपर्वकी सम्पूर्ण श्लोक-संख्या ७१३३ |
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