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mahabharat 5.196.31-32: हे भारत! इनके अतिरिक्त युद्ध में महात्मा युधिष्ठिर के पास स्वयं सत्तर हज़ार हाथी और थे, जिनके मस्तक से वर्षा करने वाले बादलों के समान मद की धाराएँ बह रही थीं। वे सभी गतिशील पर्वतों के समान राजा युधिष्ठिर के पीछे-पीछे चल रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 5.196: पाण्डवसेनाका युद्धके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 196: पाण्डवसेनाका युद्धके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  5.196.31-32 
षष्टिर्नागसहस्राणि दशान्यानि च भारत।
युधिष्ठिरस्य यान्यासन् युधि सेना महात्मन:॥ ३१॥
क्षरन्त इव जीमूता: प्रभिन्नकरटामुखा:।
राजानमन्वयु: पश्चाच्चलन्त इव पर्वता:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! इनके अतिरिक्त युद्ध में महात्मा युधिष्ठिर के पास स्वयं सत्तर हज़ार हाथी और थे, जिनके मस्तक से वर्षा करने वाले बादलों के समान मद की धाराएँ बह रही थीं। वे सभी गतिशील पर्वतों के समान राजा युधिष्ठिर के पीछे-पीछे चल रहे थे।
 
Bharat! Besides these, in the war, Mahatma Yudhishthira personally had seventy thousand more elephants, which flowed streams of intoxication from their foreheads like rain-bearing clouds. All of them were following King Yudhishthira like movable mountains.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)