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mahabharat 5.196.28-30: उनके पीछे सुचित्त के पुत्र, वीर योद्धा सत्यधृति, श्रेणिमान, वसुदान और काशीराज के पराक्रमी पुत्र थे। इन सबके पीछे बीस हज़ार रथी, घंटियों से सुसज्जित दस करोड़ घोड़े, राजा के दण्ड के समान दाँत वाले, आक्रमण में कुशल, उत्तम कुल में उत्पन्न, अमृत से सराबोर और बादलों के समान गति करने वाले बीस हज़ार हाथी थे।   |   mahabharat अध्याय 5.196: पाण्डवसेनाका युद्धके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 196: पाण्डवसेनाका युद्धके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 28-30
 
 
श्लोक  5.196.28-30 
तमन्वयात् सत्यधृति: सौचित्तिर्युद्धदुर्मद:।
श्रेणिमान् वसुदानश्च पुत्र: काश्यस्य वा विभु:॥ २८॥
रथा विंशतिसाहस्रा ये तेषामनुयायिन:।
हयानां दश कोटॺश्च महतां किंकिणीकिनाम्॥ २९॥
गजा विंशतिसाहस्रा ईषादन्ता: प्रहारिण:।
कुलीना भिन्नकरटा मेघा इव विसर्पिण:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
उनके पीछे सुचित्त के पुत्र, वीर योद्धा सत्यधृति, श्रेणिमान, वसुदान और काशीराज के पराक्रमी पुत्र थे। इन सबके पीछे बीस हज़ार रथी, घंटियों से सुसज्जित दस करोड़ घोड़े, राजा के दण्ड के समान दाँत वाले, आक्रमण में कुशल, उत्तम कुल में उत्पन्न, अमृत से सराबोर और बादलों के समान गति करने वाले बीस हज़ार हाथी थे।
 
Behind them were Suchitta's sons, the brave warrior Satyadhriti, Shreniman, Vasudana and the powerful sons of the King of Kashi. Following all these were twenty thousand charioteers, ten crore horses adorned with bells, twenty thousand elephants with teeth like the staff of a king, skilled in attacking, born in a good race, flowing with nectar and moving like clouds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)