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mahabharat 5.196.12: भयंकर धनुर्धरों से सुसज्जित और धृष्टद्युम्न द्वारा सुरक्षित वह पाण्डव सेना कभी रुकती और कभी आगे बढ़ती हुई, कभी जल से भरी हुई, कभी स्थिर और कभी बहती हुई गंगा के समान प्रतीत होती थी॥ 12॥   |   mahabharat अध्याय 5.196: पाण्डवसेनाका युद्धके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 196: पाण्डवसेनाका युद्धके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.196.12 
भीमधन्वायनी सेना धृष्टद्युम्नेन पालिता।
गङ्गेव पूर्णा स्तिमिता स्यन्दमाना व्यदृश्यत॥ १२॥
 
 
अनुवाद
भयंकर धनुर्धरों से सुसज्जित और धृष्टद्युम्न द्वारा सुरक्षित वह पाण्डव सेना कभी रुकती और कभी आगे बढ़ती हुई, कभी जल से भरी हुई, कभी स्थिर और कभी बहती हुई गंगा के समान प्रतीत होती थी॥ 12॥
 
That Pandava army, decked with fierce archers and protected by Dhrishtadyumna, sometimes halting and sometimes advancing, sometimes appeared like the Ganges, filled with water, sometimes motionless and sometimes flowing.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)