श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 196: पाण्डवसेनाका युद्धके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.196.1 
वैशम्पायन उवाच
तथैव राजा कौन्तेयो धर्मपुत्रो युधिष्ठिर:।
धृष्टद्युम्नमुखान् वीरांश्चोदयामास भारत॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! इसी प्रकार कुन्तीनन्दन धर्मपुत्र राजा युधिष्ठिर ने भी धृष्टद्युम्न आदि योद्धाओं को युद्ध के लिये जाने का आदेश दिया। 1॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! Similarly, King Yudhishthir, son of Kuntinandan Dharma, also ordered the warriors like Dhrishtadyumna and others to go for war. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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