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mahabharat 5.194.15: परंतु युद्ध में दिव्यास्त्रों द्वारा साधारण मनुष्यों को मारना कभी उचित नहीं है; अतः हम लोग साधारण युद्ध द्वारा ही शत्रुओं को परास्त करेंगे॥15॥   |   mahabharat अध्याय 5.194: अर्जुनके द्वारा अपनी, अपने सहायकोंकी तथा युधिष्ठिरकी भी शक्तिका परिचय देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 194: अर्जुनके द्वारा अपनी, अपने सहायकोंकी तथा युधिष्ठिरकी भी शक्तिका परिचय देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.194.15 
न तु युक्तं रणे हन्तुं दिव्यैरस्त्रै: पृथग्जनम्।
आर्जवेनैव युद्धेन विजेष्यामो वयं परान्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
परंतु युद्ध में दिव्यास्त्रों द्वारा साधारण मनुष्यों को मारना कभी उचित नहीं है; अतः हम लोग साधारण युद्ध द्वारा ही शत्रुओं को परास्त करेंगे॥15॥
 
‘But it is never appropriate to kill ordinary people with divine weapons in a war; therefore we shall defeat the enemies through a simple war.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)