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mahabharat 5.193.18: ‘जैसे शान्तनु नन्दन भीष्म एक महीने में पाण्डव सेना का संहार कर सकते हैं, वैसे ही मैं भी उतने ही समय में कर सकता हूँ, ऐसा मेरा विश्वास है। यही मेरी सबसे बड़ी शक्ति है और यही मेरी अधिकतम शक्ति है।’॥18॥   |   mahabharat अध्याय 5.193: दुर्योधनके पूछनेपर भीष्म आदिके द्वारा अपनी-अपनी शक्तिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 193: दुर्योधनके पूछनेपर भीष्म आदिके द्वारा अपनी-अपनी शक्तिका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.193.18 
यथा भीष्म: शान्तनवो मासेनेति मतिर्मम।
एषा मे परमा शक्तिरेतन्मे परमं बलम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
‘जैसे शान्तनु नन्दन भीष्म एक महीने में पाण्डव सेना का संहार कर सकते हैं, वैसे ही मैं भी उतने ही समय में कर सकता हूँ, ऐसा मेरा विश्वास है। यही मेरी सबसे बड़ी शक्ति है और यही मेरी अधिकतम शक्ति है।’॥18॥
 
‘Just as Shantanu Nandan Bhishma can destroy the Pandava army in one month, I can also do it in the same time, I believe so. This is my biggest power and this is my maximum strength.’॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)