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mahabharat 5.193.13: हे भरत! इस नियम का पालन करने से मैं सदैव तत्पर और तत्पर रह सकता हूँ और इतने ही समय में उस विशाल सेना का नाश कर सकता हूँ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 5.193: दुर्योधनके पूछनेपर भीष्म आदिके द्वारा अपनी-अपनी शक्तिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 193: दुर्योधनके पूछनेपर भीष्म आदिके द्वारा अपनी-अपनी शक्तिका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.193.13 
अनेनाहं विधानेन संनद्ध: सततोत्थित:।
क्षपयेयं महत् सैन्यं कालेनानेन भारत॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे भरत! इस नियम का पालन करने से मैं सदैव तत्पर और तत्पर रह सकता हूँ और इतने ही समय में उस विशाल सेना का नाश कर सकता हूँ॥13॥
 
O Bharata! By following this rule, I can always remain prepared and prepared and destroy that huge army in this much time. ॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)