Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.192.8-9: भीष्मजी कहते हैं- नरेश्वर! इस प्रकार बातचीत करके उन्होंने एक-दूसरे से प्रतिज्ञा की और दोनों ने एक-दूसरे के शरीर में अपना-अपना पुरुषत्व और स्त्रीत्व प्रविष्ट कर दिया। ¨हद स्थूणाकर्ण यक्ष ने उस शिखण्डिनी का स्त्रीत्व ग्रहण किया और शिखण्डिनी ने यक्ष का तेजोमय पुरुषत्व प्राप्त किया। 8-9॥ | mahabharat अध्याय 5.192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्मजी कहते हैं- नरेश्वर! इस प्रकार बातचीत करके उन्होंने एक-दूसरे से प्रतिज्ञा की और दोनों ने एक-दूसरे के शरीर में अपना-अपना पुरुषत्व और स्त्रीत्व प्रविष्ट कर दिया। ¨हद स्थूणाकर्ण यक्ष ने उस शिखण्डिनी का स्त्रीत्व ग्रहण किया और शिखण्डिनी ने यक्ष का तेजोमय पुरुषत्व प्राप्त किया। 8-9॥
Bhishmaji says- Nareshwar! By talking in this way, they made a vow to each other and both of them infused their respective manhood and womanhood into each other's body. India Sthunakarna Yaksha assumed the femininity of that Shikhandini and Shikhandini acquired the luminous masculinity of the Yaksha. 8-9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥