Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.192.67-68: हे प्रिय! इसी कारण मैं शिखंडी को नहीं मार सकता। मैं शिखंडी के जन्म की वास्तविक कथा जानता हूँ। इसलिए यदि वह अत्याचारी बनकर भी युद्धभूमि में आए, तो भी मैं उसे नहीं मारूँगा। 67-68 | mahabharat अध्याय 5.192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न हन्यामहमेतेन कारणेन शिखण्डिनम्॥ ६७॥
एतत् तत्त्वमहं वेद जन्म तात शिखण्डिन:।
ततो नैनं हनिष्यामि समरेष्वाततायिनम्॥ ६८॥
अनुवाद
हे प्रिय! इसी कारण मैं शिखंडी को नहीं मार सकता। मैं शिखंडी के जन्म की वास्तविक कथा जानता हूँ। इसलिए यदि वह अत्याचारी बनकर भी युद्धभूमि में आए, तो भी मैं उसे नहीं मारूँगा। 67-68
O dear! For this very reason I cannot kill Shikhandi. I know the real story of Shikhandi's birth. Therefore even if he comes to the battlefield as a tyrant, I will not kill him. 67-68.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥