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mahabharat 5.192.64: भरतश्रेष्ठ! काशीराज की ज्येष्ठ कन्या, जो अम्बा नाम से विख्यात थी, द्रुपद के कुल में शिखण्डी के रूप में उत्पन्न हुई ॥64॥   |   mahabharat अध्याय 5.192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  5.192.64 
ज्येष्ठा काशिपते: कन्या अम्बानामेति विश्रुता।
द्रुपदस्य कुले जाता शिखण्डी भरतर्षभ॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! काशीराज की ज्येष्ठ कन्या, जो अम्बा नाम से विख्यात थी, द्रुपद के कुल में शिखण्डी के रूप में उत्पन्न हुई ॥64॥
 
Bharatshrestha! Kashiraj's eldest daughter, who was famous by the name Amba, was born in the form of Shikhandi in Drupada's family. 64॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)