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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय
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श्लोक 63
श्लोक
5.192.63
एवमेष महाराज स्त्रीपुमान् द्रुपदात्मज:।
स सम्भूत: कुरुश्रेष्ठ शिखण्डी रथसत्तम:॥ ६३॥
अनुवाद
महाराज! कुरुश्रेष्ठ! इस प्रकार रथियों में श्रेष्ठ द्रुपदकुमार शिखण्डी पहले स्त्री रूप में उत्पन्न हुए और बाद में पुरुष हुए ॥63॥
Maharaj! Kurushrestha! In this way, Drupadakumar Shikhandi, the best among charioteers, was first born in a female form and later became a male. 63॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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