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mahabharat 5.192.62: मैंने द्रुपद नगर में कुछ गुप्तचर नियुक्त किए थे, जो वहाँ गूंगे, अंधे और बहरे का स्वांग रचकर रहते थे। वे ही मुझे सारा समाचार ठीक-ठीक बताते थे।   |   mahabharat अध्याय 5.192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  5.192.62 
मम त्वेतच्चरास्तात यथावत् प्रत्यवेदयन्।
जडान्धबधिराकारा ये मुक्ता द्रुपदे मया॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
मैंने द्रुपद नगर में कुछ गुप्तचर नियुक्त किए थे, जो वहाँ गूंगे, अंधे और बहरे का स्वांग रचकर रहते थे। वे ही मुझे सारा समाचार ठीक-ठीक बताते थे।
 
I had appointed some spies in the city of Drupada, who lived there pretending to be dumb, blind and deaf. They were the ones who would tell me all the news accurately. 62.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)