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mahabharat 5.192.6: शिखंडिनी बोली - हे प्रभु! मैं समय आने पर आपका पुरुषत्व लौटा दूँगी। हे रात्रिचर! आप कुछ समय के लिए मेरा स्त्रीत्व ग्रहण कर लीजिए।   |   mahabharat अध्याय 5.192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.192.6 
शिखण्डिन्युवाच
प्रतिदास्यामि भगवन् पुँल्लिङ्गं तव सुव्रत।
किञ्चित्कालान्तरं स्त्रीत्वं धारयस्व निशाचर॥ ६॥
 
 
अनुवाद
शिखंडिनी बोली - हे प्रभु! मैं समय आने पर आपका पुरुषत्व लौटा दूँगी। हे रात्रिचर! आप कुछ समय के लिए मेरा स्त्रीत्व ग्रहण कर लीजिए।
 
Shikhandini said - O Lord! I will return your manhood in time. O night-walker! You take my womanhood for some time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)