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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय
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श्लोक 57
श्लोक
5.192.57
भीष्म उवाच
एवमुक्त: शिखण्डी तु स्थूणयक्षेण भारत।
प्रत्याजगाम नगरं हर्षेण महता वृत:॥ ५७॥
अनुवाद
भीष्म कहते हैं- भरतनन्दन! स्थूनाकर्ण यक्ष की यह बात सुनकर शिखंडी अत्यंत प्रसन्न होकर अपने नगर को लौट आया। 57॥
Bhishma says – Bharatanandan! Hearing this from Sthunakaran Yaksha, Shikhandi returned to his city with great joy. 57॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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