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mahabharat 5.192.54: राजकुमार शिखण्डी को शान्त भाव से आते देख यक्ष ने उन्हें सम्पूर्ण वृत्तान्त विस्तारपूर्वक सुनाया।   |   mahabharat अध्याय 5.192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  5.192.54 
आर्जवेनागतं दृष्ट्वा राजपुत्रं शिखण्डिनम्।
सर्वमेव यथावृत्तमाचचक्षे शिखण्डिने॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
राजकुमार शिखण्डी को शान्त भाव से आते देख यक्ष ने उन्हें सम्पूर्ण वृत्तान्त विस्तारपूर्वक सुनाया।
 
Seeing Prince Shikhandi arriving calmly, the Yaksha narrated the whole story to him in full detail. 54.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)