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mahabharat 5.192.53: शिखंडी उनके पास गया और बोला, "प्रभु! मैं आपकी सेवा में उपस्थित हूँ।" तब स्थूनाकर्ण ने उनसे बार-बार कहा, "मैं आपसे बहुत प्रसन्न हूँ, बहुत प्रसन्न हूँ।"   |   mahabharat अध्याय 5.192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  5.192.53 
सोऽभिगम्याब्रवीद् वाक्यं प्राप्तोऽस्मि भगवन्निति।
तमब्रवीत् तत: स्थूण: प्रीतोऽस्मीति पुन: पुन:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
शिखंडी उनके पास गया और बोला, "प्रभु! मैं आपकी सेवा में उपस्थित हूँ।" तब स्थूनाकर्ण ने उनसे बार-बार कहा, "मैं आपसे बहुत प्रसन्न हूँ, बहुत प्रसन्न हूँ।"
 
Shikhandi went near him and said, "Lord! I am present in your service." Then Sthunakarna told him repeatedly, "I am very pleased with you, very pleased."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)