Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.192.50-51: यक्षो! शिखण्डी के मारे जाने पर यह स्थूनाकर्ण्याक्ष पुनः अपना पूर्व रूप धारण कर लेगा। अतः अब इसे निर्भय हो जाना चाहिए।' ऐसा कहकर उन यक्षों द्वारा परम पूजित महाप्रभु यक्षराज कुबेर अपने समस्त सेवकों सहित वहाँ से चले गए, जो क्षण मात्र में इच्छित स्थान पर पहुँच गए ॥50-51॥ | mahabharat अध्याय 5.192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यक्षो! शिखण्डी के मारे जाने पर यह स्थूनाकर्ण्याक्ष पुनः अपना पूर्व रूप धारण कर लेगा। अतः अब इसे निर्भय हो जाना चाहिए।' ऐसा कहकर उन यक्षों द्वारा परम पूजित महाप्रभु यक्षराज कुबेर अपने समस्त सेवकों सहित वहाँ से चले गए, जो क्षण मात्र में इच्छित स्थान पर पहुँच गए ॥50-51॥
Yaksho! After Shikhandi is killed, this Sthunakarnyaksha will regain his previous form. Hence now he should become fearless.' Saying this, the great Lord Yaksharaj Kuber, who was highly worshiped by those Yaksha's, went away from there along with all his servants who reached the desired place in just a few seconds. 50-51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥