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mahabharat 5.192.49: तत्! तब महात्मा यक्षराज ने उस शाप का अन्त करने की इच्छा से उन समस्त यक्षों से, जो स्थूणाकर्ण का इस प्रकार अनुसरण कर रहे थे, कहा - ॥49॥   |   mahabharat अध्याय 5.192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  5.192.49 
ततो महात्मा यक्षेन्द्र: प्रत्युवाचानुगामिन:।
सर्वान् यक्षगणांस्तात शापस्यान्तचिकीर्षया॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
तत्! तब महात्मा यक्षराज ने उस शाप का अन्त करने की इच्छा से उन समस्त यक्षों से, जो स्थूणाकर्ण का इस प्रकार अनुसरण कर रहे थे, कहा - ॥49॥
 
Tat! Then Mahatma Yaksharaj, wishing to put an end to that curse, said to all those Yakshaas who were following Sthunakaran in this way – ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)