श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  5.192.48 
तत: प्रसादयामासुर्यक्षा वैश्रवणं किल।
स्थूणस्यार्थे कुरुष्वान्तं शापस्येति पुन:पुन:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
तब यक्षों ने अनुनय-विनय करके स्थूनाकर्ण के लिए कुबेर को प्रसन्न किया और बार-बार आग्रहपूर्वक कहा - 'प्रभो! इस शाप का अन्त कर दीजिए॥48॥
 
Then the Yakshas pleased Kubera for Sthunakarna by persuasion and repeatedly said with insistence – 'Lord! End this curse. 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)