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mahabharat 5.192.43: तब यक्षराज ने कहा, ‘स्थूनाकर्ण को यहाँ लाओ। मैं उसे दण्ड दूँगा।’ उन्होंने बार-बार यही बात दोहराई ॥43॥   |   mahabharat अध्याय 5.192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  5.192.43 
आनीयतां स्थूण इति ततो यक्षाधिपोऽब्रवीत्।
कर्तास्मि निग्रहं तस्य प्रत्युवाच पुन: पुन:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
तब यक्षराज ने कहा, ‘स्थूनाकर्ण को यहाँ लाओ। मैं उसे दण्ड दूँगा।’ उन्होंने बार-बार यही बात दोहराई ॥43॥
 
Then the Yaksharaj said, 'Bring Sthunakarna here. I will punish him.' He repeated this again and again. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)