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mahabharat 5.192.33: दूसरी ओर, कुछ समय बाद नरवाहन कुबेर संसार में भ्रमण करते हुए स्थूनाकर्ण के घर आये।   |   mahabharat अध्याय 5.192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  5.192.33 
कस्यचित् त्वथ कालस्य कुबेरो नरवाहन:।
लोकयात्रां प्रकुर्वाण: स्थूणस्यागान्निवेशनम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
दूसरी ओर, कुछ समय बाद नरवाहन कुबेर संसार में भ्रमण करते हुए स्थूनाकर्ण के घर आये।
 
On the other hand, after some time, Narvahana Kuber, while traveling in the world, came to the house of Sthunakarn.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)