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mahabharat 5.192.32: इतना ही नहीं, उसने अपनी पुत्री को भी झूठा समाचार भेजने के लिए फटकार लगाई। फिर राजा द्रुपद से सम्मानित होकर वह लौट आया। जब दशार्णराज हिरण्यवर्मा उसके मानसिक कल्मषों को दूर करके प्रसन्नतापूर्वक लौटा, तो शिखंडिनी भी बहुत प्रसन्न हुई। 32.   |   mahabharat अध्याय 5.192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.192.32 
पूजितश्च प्रतिययौ निर्भर्त्स्य तनयां किल।
विनीतकिल्बिषे प्रीते हेमवर्मणि पार्थिवे।
प्रतियाते दशार्णे तु हृष्टरूपा शिखण्डिनी॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
इतना ही नहीं, उसने अपनी पुत्री को भी झूठा समाचार भेजने के लिए फटकार लगाई। फिर राजा द्रुपद से सम्मानित होकर वह लौट आया। जब दशार्णराज हिरण्यवर्मा उसके मानसिक कल्मषों को दूर करके प्रसन्नतापूर्वक लौटा, तो शिखंडिनी भी बहुत प्रसन्न हुई। 32.
 
Not only this, he also rebuked his daughter for sending false news. Then he returned after being honoured by King Drupada. Shikhandini was also very happy when Dasharnaraj Hiranyavarma returned happily after removing her mental impurities. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)