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mahabharat 5.192.31: राजा बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने अपने दामाद शिखंडी को बहुत सारा धन, हाथी, घोड़े, गाय, बैल और दासियाँ दीं।   |   mahabharat अध्याय 5.192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.192.31 
शिखण्डिने च मुदित: प्रादाद् वित्तं जनेश्वर:।
हस्तिनोऽश्वांश्च गाश्चैव दास्योऽथ बहुलास्तथा॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
राजा बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने अपने दामाद शिखंडी को बहुत सारा धन, हाथी, घोड़े, गाय, बैल और दासियाँ दीं।
 
The king was very pleased and gave his son-in-law Shikhandi a lot of wealth, elephants, horses, cows, bulls and maids.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)