Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.192.30: इस प्रकार उसकी परीक्षा करके राजा हिरण्यवर्मा बहुत प्रसन्न हुआ और अपने बंधु-बांधवों से मिलकर बड़े आनन्द और प्रसन्नता से वहाँ रहने लगा।   |   mahabharat अध्याय 5.192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.192.30 
तत: कृत्वा तु राजा स आगमं प्रीतिमानथ।
सम्बन्धिना समागम्य हृष्टो वासमुवास ह॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उसकी परीक्षा करके राजा हिरण्यवर्मा बहुत प्रसन्न हुआ और अपने बंधु-बांधवों से मिलकर बड़े आनन्द और प्रसन्नता से वहाँ रहने लगा।
 
After testing him in this manner, King Hiranyavarma became very pleased. Then he met his relatives and lived there with great joy and happiness. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)