श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.192.27 
आगम: क्रियतां व्यक्त: कुमारोऽयं सुतो मम।
मिथ्यैतदुक्तं केनापि तदश्रद्धेयमित्युत॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! कृपया आकर अच्छी तरह जाँच कर लीजिए। मेरा यह राजकुमार पुत्र है (पुत्री नहीं)। किसी ने आपसे झूठ कह दिया है कि यह पुत्री है, जो विश्वास करने योग्य नहीं है।॥27॥
 
‘O King! Please come and examine clearly. This prince of mine is a son (not a daughter). Someone has falsely told you that she is a daughter, which is not worth believing.'॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)