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mahabharat 5.192.26: हे राजन! वह दशार्ण के राजा के पास आया और द्रुपद ने जो कुछ कहा था, वह सब उसने कह सुनाया।   |   mahabharat अध्याय 5.192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.192.26 
तमागम्य तु राजानं दशार्णाधिपतिं तदा।
तद् वाक्यमाददे राजन् यदुक्तं द्रुपदेन ह॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! वह दशार्ण के राजा के पास आया और द्रुपद ने जो कुछ कहा था, वह सब उसने कह सुनाया।
 
O King! He came to the King of Dasharna and repeated everything that Drupada had said. 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)