श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.192.25 
तत: सम्प्रेषयामास द्रुपदोऽपि महात्मने।
हिरण्यवर्मणे दूतं ब्राह्मणं वेदपारगम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् द्रुपद ने भी वेदों के पारंगत विद्वान् एक ब्राह्मण को दूत बनाकर महाबली हिरण्यवर्मा के पास भेजा॥25॥
 
Thereafter, Drupada also sent a Brahmin, an expert scholar of the Vedas, to the great Hiranyavarma as a messenger. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)