श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  5.192.23-24 
अभवद् भरतश्रेष्ठ द्रुपद: प्रणयानत:॥ २३॥
यदाह मां भवान् ब्रह्मन् सम्बन्धिवचनाद् वच:।
अस्योत्तरं प्रतिवचो दूतो राज्ञे वदिष्यति॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! तब राजा द्रुपद प्रेम से विनीत होकर इस प्रकार बोले- 'ब्राह्मण! आपने मेरे सम्बन्धी के कहने से जो कुछ मुझसे कहा है, उसका उत्तर मेरा दूत स्वयं जाकर राजा को देगा।'॥23-24॥
 
O best of the Bharatas! Then King Drupada became humble with love and said thus- 'Brahmin! Whatever you have told me as per the instructions of my relative, my messenger himself will go and give the answer to the king.'॥ 23-24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)