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mahabharat 5.192.22-23h: इस प्रकार पुरोहित ने राजा दषार्ण का निन्दापूर्ण सन्देश मंत्रियों के बीच बैठे राजा द्रुपद को सुनाया।   |   mahabharat अध्याय 5.192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  5.192.22-23h 
तदुपालम्भसंयुक्तं श्रावित: किल पार्थिव:॥ २२॥
दशार्णपतिना चोक्तो मन्त्रिमध्ये पुरोधसा।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार पुरोहित ने राजा दषार्ण का निन्दापूर्ण सन्देश मंत्रियों के बीच बैठे राजा द्रुपद को सुनाया।
 
In this way the priest conveyed the reproachful message of King Dasharna to King Drupada who was sitting among the ministers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)