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mahabharat 5.192.13-14h: इधर राजा दशार्ण ने शोक और शोक में डूबकर अचानक पांचाल के राजा द्रुपद पर आक्रमण कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 5.192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 192: शिखण्डीको पुरुषत्वकी प्राप्ति, द्रुपद और हिरण्यवर्माकी प्रसन्नता, स्थूणाकर्णको कुबेरका शाप तथा भीष्मका शिखण्डीको न मारनेका निश्चय  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  5.192.13-14h 
अथ दाशार्णको राजा सहसाभ्यागमत् तदा॥ १३॥
पञ्चालराजं द्रुपदं दु:खशोकसमन्वित:।
 
 
अनुवाद
इधर राजा दशार्ण ने शोक और शोक में डूबकर अचानक पांचाल के राजा द्रुपद पर आक्रमण कर दिया।
 
Here King Dasharna, immersed in grief and sorrow, suddenly attacked King Drupada of Panchala. 13 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)